वो गुरु ही तो है जिसने धरा रूप निराला

नर तन धर हम आ गए,पर चारो ओर झमेला है।हे ! ईश्वर मन मेरा भरमाए,यह कहाँ मुझे धकेला है।। डरना नहीं है तुझको,मिलेंगे अनेक रक्षक तुझको।बस उनको तू पहचान लेना,हाथ उनका कसकर थाम लेना।। सही कहा था आपने हे ! ईश्वर।। मेरे लड़खड़ाते कदमों को स्थिर करने वाला,मेरी तोतली बोली में दुनिया के शब्द भरने … Continue reading वो गुरु ही तो है जिसने धरा रूप निराला

तितली वाला फूल

आज रास्ते में तितली वाला फूल दिख गया,आखों के सामने कुछ चित्र चलने लगे,हँसता खिलखिलाता एक चेहरा,फूल की पत्तियों की सीटी बजाता हुआ । दूसरे ही पल स्मृति के वह दृश्य सदृश्य हो उठे,बच्चों की एक टोली वहाँ से गुजरती थम गई,एक एक करके फूल की पखुड़िया बज उठी । कदम एकाएक उनकी ओर बढ़ने … Continue reading तितली वाला फूल