शहर में कुछ धुआं सा है

लोग नाराज़ है,कुछ कोसते भी हैक्यों शहर में धुआं सा है ।जैसे खुद को इस शहर ने ही जलाया हो,पूछते सब है कैसा यह शहर है,जहां सब धुंधला सा है ॥ शहर मेरा आज कुछ उलझा सा है,कहाँ मैं खो गया, कैसे हाल यह मेरा हो गया ।मैंने कब खुद को ऐसा चाहा था ,बस … Continue reading शहर में कुछ धुआं सा है

आज और कल

कल फिर आती हूँ , यह कह वो चली गईन कल आया और न वो आई कल फिर आने का कहकर जो चली गईवो आने वाला नहीं बीता हुआ कल हैभ्रम है, मिथ्या है, छल है कल के इंतज़ार में, तू इस बात से अनजान हैजो कल की आस है, वो कहीं आज ही तेरे … Continue reading आज और कल

इतना गुस्सा ठीक नहीं

"इतना गुस्सा ठीक नहीं है", अक्सर पापा कहा करते थे। झल्लाया मन सोचता था, "लड़की हूँ इसलिए मुझे ही ज्ञान मिलता है, गुस्से की बात पर तो गुस्सा आएगा ही"। "गुस्सा सेहत के लिए ठीक नहीं होता लाडो रानी", वह अपनी बात हमेशा लाड लड़ाते हुए पूरी कर देते। पापा का प्रयास निरंतर जारी रहा, … Continue reading इतना गुस्सा ठीक नहीं

वो गुरु ही तो है जिसने धरा रूप निराला

नर तन धर हम आ गए,पर चारो ओर झमेला है।हे ! ईश्वर मन मेरा भरमाए,यह कहाँ मुझे धकेला है।। डरना नहीं है तुझको,मिलेंगे अनेक रक्षक तुझको।बस उनको तू पहचान लेना,हाथ उनका कसकर थाम लेना।। सही कहा था आपने हे ! ईश्वर।। मेरे लड़खड़ाते कदमों को स्थिर करने वाला,मेरी तोतली बोली में दुनिया के शब्द भरने … Continue reading वो गुरु ही तो है जिसने धरा रूप निराला