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कश्मकश

मुश्किल मे जब दिल घबराया, दिमाग उस पर गुर्राया ।
हार का आईना दिखा, दिल को दहलाया ।।

अब दिखा हिम्मत, जिसके कसीदे तू नाप आया ।
ठहाका मार दिमाग खिलखिलाया ।।

दिल बेचारा, कश्मकश मे, सूझे न कुछ इस पल में ।
तैयारी खूब थी लङने की, तीर भी सहेजे तरकश मे ।।

पर  कहीं कुछ छूट गया, जैसे कुछ खो गया ।
हिम्मत, आस्था डगमगाये, मानो अब कुछ न हो पाये ।।

झकझोरने वाले इस पल में, अन्धियारी हर आस है ।
डूबा मनोबल, क्या यही अन्त का अहसास है ।।

टूटने की कगार पर कुछ दिल को हिला गया ।
लङने का एहसास उसमें जगा गया ।।

क्यों न तू पहचाने,परीक्षा का ये पल,परखा जाए तेरा सम्बल।
दिल ने खुद को सम्भाला, छिपी किरण को निकाला ।।

दिमाग ने उसको सहलाया, मैं तेरी गहराई नापने आया ।
हर मुश्किल हार जाए तुझसे, भीतर का डर जो हो हराया ।।

मुश्किलों के दौर मे, अक्सर हम टूट जाते हैं ।
सब कुछ जानकर भी खुद से रूठ जाते हैं ।।