वो गुरु ही तो है जिसने धरा रूप निराला

नर तन धर हम आ गए,पर चारो ओर झमेला है।हे ! ईश्वर मन मेरा भरमाए,यह कहाँ मुझे धकेला है।। डरना नहीं है तुझको,मिलेंगे अनेक रक्षक तुझको।बस उनको तू पहचान लेना,हाथ उनका कसकर थाम लेना।। सही कहा था आपने हे ! ईश्वर।। मेरे लड़खड़ाते कदमों को स्थिर करने वाला,मेरी तोतली बोली में दुनिया के शब्द भरने … Continue reading वो गुरु ही तो है जिसने धरा रूप निराला

अभिमान

इंसान भी गजब एंटरटेनमेंट हैहर एक ने अपनी गढ़ी हुई एक सल्तनत हैहर किसी को मैं की भयंकर बिमारी हैकुछ को तो मालूम नहीं की अहम् ने उनकी क्या दशा कर डाली है कोई सुंदरता पर इतराया है,तो किसी को अपने ज्ञान का मोल भाया हैकुछ सबको खरीदने का दम भरते,कुछ ने न जाने क्या … Continue reading अभिमान

ढलते जीवन की लाचारी

धीमी गति, कांपता बदनबुझी आँखें, गुमशुदा स्वपन। ऐसे में कोई तो आएपलभर साथ का एहसास दे जाए । हम भी भागा करते थे कभीन जाने कब ज़माने की रफ्तार बढीहम ढूंढते रहे,  कारवां आगे बढ़ गया ।कम्बख्त जिन्दगी भी अजीब हैजिस भीङ के लिए जिएआज उसी भीड़ मे अकेले रह गए । अंत तो कभी … Continue reading ढलते जीवन की लाचारी

कश्मकश

मुश्किल मे जब दिल घबराया, दिमाग उस पर गुर्राया ।हार का आईना दिखा, दिल को दहलाया ।। अब दिखा हिम्मत, जिसके कसीदे तू नाप आया ।ठहाका मार दिमाग खिलखिलाया ।। दिल बेचारा, कश्मकश मे, सूझे न कुछ इस पल में ।तैयारी खूब थी लङने की, तीर भी सहेजे तरकश मे ।। पर  कहीं कुछ छूट … Continue reading कश्मकश