तितली वाला फूल

आज रास्ते में तितली वाला फूल दिख गया,आखों के सामने कुछ चित्र चलने लगे,हँसता खिलखिलाता एक चेहरा,फूल की पत्तियों की सीटी बजाता हुआ । दूसरे ही पल स्मृति के वह दृश्य सदृश्य हो उठे,बच्चों की एक टोली वहाँ से गुजरती थम गई,एक एक करके फूल की पखुड़िया बज उठी । कदम एकाएक उनकी ओर बढ़ने … Continue reading तितली वाला फूल

बड़ा हुआ तो गुलाम हुआ

काठ का वो पालना लगता तब छोटा थासफलता की यह कुर्सी लगती ऊँची हैपर उस पालने में रोने हसने की छूट थीइस कुर्सी पर जकड़े अपना ही दम्भ है छोटा सा वो गुल्लक,सिमित सा उसका आकारअब असीमित बैंक बैलेंस, अनंत उसका विस्तारपर उस थोड़े में धन्य होने का भाव थाइस अनंत में कुछ कमी और … Continue reading बड़ा हुआ तो गुलाम हुआ